Nani Ka Ghar – Poem On Nani Ka Ghar

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

नानी का घर 💕

(Nani Ka Ghar) नानी का घर लगता ऐसा,
जैसे धरती पर हो स्वर्ग जैसा।
छोटी-छोटी खुशियाँ सारी,
छुपी हुई थीं वहाँ हमारी।

गर्मी की वो प्यारी छुट्टी,
नानी संग मस्ती ही मस्ती।
सुबह-सुबह जब आँख खुलाती,
नानी प्यार से माथा सहलाती।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

“उठ जा बेटा, सूरज आया!”
कहकर हमको पास बुलाया।
फिर रसोई में खुशबू उड़ती,
घी की रोटी मन को छूती।

आम के पेड़ों की वो छाया,
झूला झूलें, गीत भी गाया।
नानी हँसकर बातें करती,
हर शरारत पर ना डाँटती।

बारिश में कागज़ की नावें,
नानी संग कितनी मुस्काएँ।
कभी कहानी राजा-रानी,
कभी सुनाती भूतों वाली। 👻✨

रात को जब बिजली जाती,
मोमबत्ती हल्की जल जाती।
सब मिल बैठें एक ही कमरे,
हँसी गूँजे चारों पहर में।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

नानी की वो मीठी लोरी,
सबसे प्यारी हर इक बोली।
गोदी में सिर रख सो जाना,
सपनों में परियों को पाना।

अब वो दिन बस यादों में हैं,
दिल के मीठे वादों में हैं।
नानी का घर दूर सही पर,
बसता है हर धड़कन के अंदर। ❤️

जब भी मन थोड़ा घबराता,
नानी का चेहरा याद आता।
ऐसा लगता दौड़ के जाऊँ,
फिर से वही बचपन पा जाऊँ। 🌸


नानी का घर 🌸

नानी का घर सबसे प्यारा,
जैसे कोई जादू न्यारा।
दरवाज़े पर खड़ी वो हँसती,
देख हमें आँखें चमकती।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

गोदी में वो हमें बिठाती,
ढेरों प्यार रोज़ लुटाती।
कहती — “मेरा राजा आया!”
सुनकर मन खुश हो जाता।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

रसोई से खुशबू आती,
गरम पूड़ी सबको भाती।
आम, पापड़, मीठी खीर,
खाते-खाते भूलें पीर।

आँगन में वो खेल पुराने,
छुपन-छुपाई, किस्से सुहाने।
रात को छत पर तारे गिनना,
नानी संग हँसते ही रहना।

उनकी लोरी मीठी-मीठी,
नींद भी लगती थी जल्दी।
सपनों में परियाँ आ जातीं,
नानी मुस्काकर सहलातीं।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

अब जब यादें दिल में आतीं,
आँखें थोड़ी नम हो जातीं।
नानी का वो प्यार सलोना,
लगता जैसे अपना कोना।

दुनिया चाहे कितनी बदले,
बचपन वाले दिन ना बदले।
नानी का घर दिल में रहता,
हर दुख में बस प्यार ही देता। 💖


Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

नानी का घर लगता प्यारा,
जैसे खुशियों का हो सितारा।

नानी का घर लगता प्यारा,
जैसे खुशियों का हो सितारा।

गोदी में उनकी चैन मिलता,
हर दुख पल में दूर निकलता।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

गोदी में उनकी चैन मिलता,
हर दुख पल में दूर निकलता।

आम, अचार और मीठी खीर,
नानी के हाथों का स्वाद गंभीर।

आम, अचार और मीठी खीर,
नानी के हाथों का स्वाद गंभीर।

नानी की लोरी सुनते-सुनते,
सपने आते रंग-बिरंगे।

नानी की लोरी सुनते-सुनते,
सपने आते रंग-बिरंगे।

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  1. नानी का घर प्यारा लगता,
    हर दिन जैसे त्योहार लगता।
  2. नानी की मीठी मुस्कान,
    भर देती दिल में जान।
  3. नानी की गोदी सबसे प्यारी,
    लगती जैसे दुनिया सारी।
  4. आम के पेड़ों की वो छाँव,
    नानी का घर लगता गाँव।
  5. नानी जब कहानी सुनाती,
    नींद भी हँसते-हँसते आती।
  6. रोटी, खीर और मीठा प्यार,
    नानी का घर खुशियों का द्वार।
  7. छुट्टियों का सबसे मज़ा,
    नानी के घर मिलता सज़ा।
  8. नानी का आँगन बड़ा सुहाना,
    हर बच्चा चाहे वहाँ जाना।
  9. उनकी लोरी मीठी-मीठी,
    यादें लगती रंगीली-सी।
  10. नानी के हाथों का खाना,
    लगता सबसे स्वादिष्ट खज़ाना।
  11. नानी की बातें प्यारी-प्यारी,
    सुनते जाएँ बारी-बारी।
  12. नानी का घर छोटा सही,
    पर खुशियाँ वहाँ कम नहीं।
  13. उनकी गोदी में सो जाना,
    दुनिया का हर दुख भूल जाना।
  14. नानी संग खेलें खेल पुराने,
    लगते सबसे प्यारे ज़माने।
  15. नानी का प्यार अनोखा होता,
    हर रिश्ता उससे छोटा होता।
  16. सुबह-सुबह उनकी आवाज़,
    दिल में भर देती है साज़।
  17. नानी का घर याद आता,
    दिल को बहुत रुलाता।
  18. उनकी हँसी फूलों जैसी,
    बातें लगती परियों जैसी।
  19. नानी के घर की वो मस्ती,
    याद आती हर इक बस्ती।
  20. नानी का घर सबसे खास,
    जहाँ मिलता ढेर सारा प्यार।
    💖

Nani Ka Ghar4 लाइन की कविता 💖

नानी का घर सबसे न्यारा,
लगता जैसे जग से प्यारा।
प्यार भरी उनकी मुस्कान,
भर देती दिल में अरमान।

छत पर तारे गिनते थे,
हँसते-गाते फिरते थे।
नानी की मीठी बातें,
याद आती दिन-रातें।

रसोई से खुशबू आती,
गरम रोटी मन लुभाती।
नानी जब खाना खिलाती,
माँ जैसी ममता मिल जाती।

Nani Ka Ghar – नानी का घर 💕

जब भी मन उदास हो जाता,
नानी का चेहरा याद आता।
उनका घर और उनका प्यार,
लगता सबसे सुंदर संसार।
🌸

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